स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर
लेखक: Henrick Yauकैलकुलेटर
स्टांप ड्यूटी समझौते की कीमत और सरकारी सर्कल रेट (महाराष्ट्र में रेडी रेकनर) में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है — इसलिए कम कीमत लिखवाने से ड्यूटी कम नहीं होती। पंजीकरण शुल्क उसके ऊपर अलग से लगता है।
दर हर राज्य अपनी तय करता है और कई राज्य अकेली महिला खरीदार को महिला छूट देते हैं। नीचे की दरें सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा हैं — अपने उप-पंजीयक कार्यालय की ताज़ा दर भरकर गणना करें।
संपत्ति
दरें — अपने उप-पंजीयक की सूचना से भरें
ड्यूटी उस कीमत पर नहीं लगती जो आपने लिखवाई है
स्टांप ड्यूटी दो रकमों में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है: समझौते में लिखी कीमत, या सरकार का तय किया हुआ सर्कल रेट (महाराष्ट्र में इसे रेडी रेकनर दर कहते हैं)। इसीलिए दस्तावेज़ में कम कीमत लिखवाने से ड्यूटी कम नहीं होती — वह सिर्फ़ आयकर की एक अलग दिक़्क़त खड़ी कर देती है।
पंजीकरण शुल्क इससे अलग है और ड्यूटी के ऊपर जुड़ता है। कई राज्यों में उस पर एक ऊपरी सीमा भी है, यानी बड़ी संपत्ति पर वह प्रतिशत के हिसाब से बढ़ना बंद हो जाता है।
गणना किस क्रम में होती है
- समझौते की कीमत और सर्कल रेट की तुलना — जो ज़्यादा हो वही आधार बनता है।
- राज्य की दर लगती है — स्टांप ड्यूटी राज्य का विषय है, इसलिए दर हर राज्य की अपनी है।
- खरीदार देखा जाता है — कई राज्य अकेली महिला खरीदार को रियायत देते हैं, और वह आमतौर पर सिर्फ़ आवासीय संपत्ति पर मिलती है।
- पंजीकरण शुल्क जुड़ता है — अलग दर से, और जहाँ सीमा हो वहाँ सीमा तक।
- स्थानीय शुल्क जुड़ते हैं — कुछ शहरों में परिवहन उपकर, स्थानीय निकाय कर या नगर निगम का अधिभार अलग से लगता है।
इस कैलकुलेटर में राज्य चुनने पर एक शुरुआती दर भर जाती है, लेकिन असली नियंत्रण आपके हाथ में है: दोनों दरें बदली जा सकती हैं। यही सही तरीक़ा भी है, क्योंकि दरें साल के बीच में भी बदलती हैं।
जिस बात पर सबसे ज़्यादा नुक़सान होता है: महिला रियायत की शर्तें
कई राज्य महिला खरीदार को कम दर देते हैं, पर शर्तें बारीक हैं। ज़्यादातर जगह रियायत तभी मिलती है जब संपत्ति अकेली महिला के नाम रजिस्टर हो — पति के साथ संयुक्त नाम आते ही सामान्य दर लग जाती है। कुछ राज्यों में यह रियायत सिर्फ़ आवासीय संपत्ति पर है, दुकान या दफ़्तर पर नहीं। और कुछ राज्य महिला खरीदार को कोई अलग दर देते ही नहीं।
दूसरी आम भूल यह है कि लोग सिर्फ़ ड्यूटी का हिसाब लगाकर बजट बना लेते हैं। पंजीकरण शुल्क, स्थानीय उपकर, दस्तावेज़ लेखक और वकील की फ़ीस मिलाकर कुल सरकारी और क़ानूनी खर्च अक्सर संपत्ति की कीमत का काफ़ी बड़ा हिस्सा बन जाता है, और यह पैसा गृह ऋण में नहीं आता — नक़द देना पड़ता है।
आपका नंबर अलग क्यों निकल सकता है
इस कैलकुलेटर में राज्यों की जो दरें पहले से भरी हैं, वे सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा हैं। इन्हें किसी राज्य पंजीयन विभाग से सत्यापित नहीं किया गया है और अलग-अलग स्रोत अलग-अलग आँकड़े देते हैं। रजिस्ट्री से पहले अपने उप-पंजीयक कार्यालय या राज्य के पंजीयन विभाग की वेबसाइट से दर की पुष्टि कर लें और वही दर कैलकुलेटर में भरें।
इसके अलावा दर संपत्ति के प्रकार पर भी बदलती है — फ़्लैट, प्लॉट, खेती की ज़मीन और व्यावसायिक संपत्ति की दरें अलग हो सकती हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की दरें भी कई राज्यों में अलग हैं। उपहार, बँटवारे और अदला-बदली के दस्तावेज़ों पर तो पूरी तरह अलग दरें लगती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सर्कल रेट और बाज़ार भाव में क्या फ़र्क़ है? सर्कल रेट सरकार का तय किया हुआ न्यूनतम मूल्य है जिस पर संपत्ति रजिस्टर हो सकती है। बाज़ार भाव उससे ऊपर भी हो सकता है और नीचे भी। ड्यूटी हमेशा दोनों में जो ज़्यादा हो उस पर लगती है।
क्या स्टांप ड्यूटी पर कोई कर छूट मिलती है? पुरानी कर व्यवस्था में चुकाई गई स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क को उसी वर्ष धारा 80C की कुल सीमा के भीतर कटौती के तौर पर लिया जा सकता है। नई व्यवस्था में यह कटौती नहीं मिलती।
क्या ड्यूटी गृह ऋण में जुड़ जाती है? आमतौर पर नहीं। बैंक संपत्ति की कीमत पर ऋण देते हैं और स्टांप ड्यूटी तथा पंजीकरण शुल्क खरीदार को अपनी जेब से देना पड़ता है। इसीलिए डाउन पेमेंट की योजना बनाते समय इसे अलग से गिनना चाहिए।
संयुक्त खरीद पर महिला रियायत मिलेगी? ज़्यादातर राज्यों में नहीं, अगर सह-खरीदार पुरुष हो। कुछ राज्य दो महिलाओं के संयुक्त नाम पर रियायत देते हैं। यह पूरी तरह राज्य के नियम पर निर्भर है, इसलिए रजिस्ट्री से पहले पूछ लेना ही सुरक्षित है।