GST कैलकुलेटर
लेखक: Henrick Yauकैलकुलेटर
सितंबर 2025 के बदलाव के बाद GST स्लैब चार रह गए — 0, 5, 18 और 40 %। पहले वाले 12 और 28 % हटा दिए गए। कौन-सी दर लगेगी, यह वस्तु या सेवा के HSN कोड से तय होता है, इसलिए दर आपको चुननी है।
एक ही राज्य के भीतर बिक्री पर दर आधी-आधी CGST और SGST में बँटती है; दूसरे राज्य में बिक्री पर पूरी दर IGST के रूप में लगती है। तीनों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है।
रकम और दर
दरें (बदली जा सकती हैं)
अब चार दरें हैं, छह नहीं
22 सितंबर 2025 से GST स्लैब का ढाँचा बदल गया। पहले चार मुख्य दरें थीं; अब 12 और 28 वाली दरें हटा दी गई हैं और उनकी जगह ज़्यादातर चीज़ें 5 या 18 पर आ गई हैं। इनके अलावा शून्य दर वाली छूट प्राप्त चीज़ें हैं और अवगुण तथा विलासिता की वस्तुओं के लिए एक नई 40 % वाली दर है।
कौन-सी दर लगेगी, यह वस्तु या सेवा के HSN कोड (सेवाओं में SAC कोड) से तय होता है। कोई कैलकुलेटर यह तय नहीं कर सकता — इसीलिए यहाँ दर आपको चुननी होती है, और चाहें तो अपनी दर भी भर सकते हैं।
गणना किस क्रम में होती है
- दर तय होती है — HSN या SAC कोड के हिसाब से।
- देखा जाता है कि रकम में GST शामिल है या नहीं — यह सबसे ज़्यादा भूल वाली जगह है।
- शामिल न हो तो रकम पर सीधे दर का प्रतिशत लगता है और वह रकम के ऊपर जुड़ जाता है।
- शामिल हो तो उल्टा फ़ॉर्मूला चलता है — रकम को दर से गुणा करके, सौ और दर के जोड़ से भाग दिया जाता है।
- आपूर्ति की जगह देखी जाती है — एक ही राज्य के भीतर बिक्री पर दर आधी-आधी CGST और SGST में बँटती है; दूसरे राज्य में बिक्री पर पूरी दर IGST के रूप में लगती है।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट — पंजीकृत कारोबारी अपनी ख़रीद पर चुकाया गया GST अपनी देनदारी से घटा सकता है।
CGST, SGST और IGST — तीनों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है, बस उसके इस्तेमाल का क्रम तय है। ग्राहक के लिए तीनों का जोड़ एक जैसा रहता है; बँटवारा सिर्फ़ यह तय करता है कि पैसा केंद्र और किस राज्य के खाते में जाएगा।
जिस बात पर सबसे ज़्यादा गलती होती है: शामिल GST निकालना
अगर किसी चीज़ की कुल कीमत में GST पहले से शामिल है और आप उस पर सीधे दर का प्रतिशत लगा देंगे, तो जवाब हमेशा ज़्यादा आएगा। सही तरीक़ा दर को सौ में जोड़कर भाग देना है। दर जितनी ऊँची होगी, यह फ़र्क़ उतना ही बड़ा होगा — 40 % वाली दर पर तो यह भूल बहुत महँगी पड़ती है।
दूसरी आम उलझन यह है कि MRP में GST पहले से शामिल होता है। दुकानदार उसके ऊपर अलग से GST नहीं जोड़ सकता। रेस्तराँ के बिल में जो "सर्विस चार्ज" लिखा होता है, वह GST नहीं है और उसे देना अनिवार्य नहीं है — पर अगर वह लिया गया है तो उस पर भी GST लगता है।
तीसरी: पंजीकरण ज़रूरी है या नहीं, यह टर्नओवर से तय होता है — वस्तुओं के लिए एक सीमा है और सेवाओं के लिए उससे आधी, और कुछ विशेष श्रेणी के राज्यों में दोनों कम हैं। दूसरे राज्य में आपूर्ति करने वालों और ई-कॉमर्स से बेचने वालों को इन सीमाओं से पहले भी पंजीकरण लेना पड़ता है।
आपका नंबर अलग क्यों निकल सकता है
बिल में छूट, माल भाड़ा, पैकिंग और बीमा किस क्रम में जोड़े गए, इससे कर योग्य मूल्य बदल जाता है — GST छूट घटाने के बाद वाले मूल्य पर लगता है, पर भाड़ा और बीमा आमतौर पर उसमें जुड़ते हैं। रिवर्स चार्ज वाली आपूर्तियों में कर विक्रेता नहीं, ख़रीदार भरता है।
कंपोज़िशन योजना वालों का हिसाब पूरी तरह अलग है — वे टर्नओवर पर एक छोटी दर भरते हैं, ग्राहक से GST वसूल नहीं सकते और इनपुट टैक्स क्रेडिट भी नहीं ले सकते। निर्यात शून्य दर वाली आपूर्ति है और उसमें रिफ़ंड का अलग रास्ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
12 और 28 वाली दरें सचमुच ख़त्म हो गईं? हाँ, सितंबर 2025 के बदलाव के बाद मुख्य ढाँचा शून्य, 5 और 18 का है, और अवगुण तथा विलासिता की चीज़ों के लिए 40 की एक अलग दर है। किसी ख़ास वस्तु की दर gst.gov.in के रेट फ़ाइंडर पर देखी जा सकती है।
CGST और SGST अलग-अलग क्यों दिखते हैं? क्योंकि एक हिस्सा केंद्र को जाता है और दूसरा उस राज्य को जहाँ उपभोग हुआ। आपके लिए कुल कर वही रहता है। दूसरे राज्य में बिक्री पर पूरा IGST लगता है, जिसे बाद में केंद्र और उपभोग वाले राज्य के बीच बाँटा जाता है।
छोटे कारोबार को पंजीकरण कब लेना पड़ता है? जब सालाना टर्नओवर तय सीमा पार कर ले। वस्तुओं और सेवाओं की सीमाएँ अलग हैं और कुछ राज्यों में कम हैं। दूसरे राज्य में आपूर्ति करने पर सीमा से पहले भी पंजीकरण लेना पड़ता है।
बिल में GST न दिखे तो? पंजीकृत विक्रेता को बिल पर अपना GSTIN, HSN कोड और कर की रकम अलग से दिखानी होती है। ऐसा न होने पर आप इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले पाएँगे, और शिकायत gst.gov.in पर की जा सकती है।