EPF कैलकुलेटर
लेखक: Henrick Yauकैलकुलेटर
EPF में कर्मचारी योगदान पूरा भविष्य निधि में जाता है, पर नियोक्ता योगदान बँट जाता है — एक हिस्सा EPS (पेंशन) में चला जाता है और वह आपके PF खाते में कभी दिखता ही नहीं। EPFO का ब्याज सिर्फ़ बाकी बचे हिस्से पर लगता है।
ब्याज दर हर साल पीछे मुड़कर घोषित होती है — 8.25 % वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित दर है, आने वाले वर्षों का वादा नहीं। अपना बैलेंस UAN से epfindia.gov.in पर देखें।
आपका खाता
दरें और सीमाएँ (बदली जा सकती हैं)
आपके PF खाते में नियोक्ता का पूरा योगदान नहीं आता
EPF का सबसे उलझाने वाला हिस्सा यही है। कर्मचारी योगदान — बेसिक और महँगाई भत्ते का 12 % — पूरा भविष्य निधि में जाता है। नियोक्ता योगदान भी 12 % ही है, पर वह बँट जाता है: एक बड़ा हिस्सा EPS यानी पेंशन योजना में चला जाता है और वह आपके PF खाते में कभी नहीं दिखता। इसीलिए साल के आख़िर में जमा दिखने वाली रकम आपकी अपेक्षा से कम लगती है।
पेंशन में जाने वाला हिस्सा वेतन सीमा पर ही गिना जाता है, चाहे बेसिक कितना भी ऊँचा हो। यह सीमा अभी 15 हज़ार रुपये महीना है। इससे ऊपर के वेतन पर नियोक्ता का लगभग पूरा योगदान PF खाते में ही आता है।
गणना किस क्रम में होती है
- आधार तय होता है — बेसिक और महँगाई भत्ता।
- कर्मचारी योगदान — आधार का 12 %, पूरा PF खाते में।
- नियोक्ता योगदान — आधार का 12 %, जिसमें से पेंशन वाला हिस्सा वेतन सीमा पर गिनकर अलग निकाल लिया जाता है और बाकी PF खाते में जुड़ता है।
- नियोक्ता के ऊपर दो और शुल्क — बीमा योजना का अंशदान और प्रशासनिक शुल्क, दोनों लगभग आधा प्रतिशत। ये आपके खाते में नहीं जुड़ते।
- ब्याज — हर महीने की चलती हुई शेष राशि पर गिना जाता है और वित्त वर्ष के अंत में एक साथ जमा होता है।
EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सवा आठ प्रतिशत की दर घोषित की और वह जुलाई 2026 में खातों में जमा हुई। कैलकुलेटर में यही दर पहले से भरी है और इसे बदला जा सकता है।
जिस बात पर सबसे ज़्यादा ग़लतफ़हमी है: ब्याज दर की घोषणा
EPF की ब्याज दर पीछे मुड़कर घोषित होती है, आगे के लिए नहीं। केंद्रीय न्यासी बोर्ड वित्त वर्ष बीत जाने के बाद तय करता है कि उस वर्ष कितना ब्याज मिलेगा, और फिर सरकार की मंज़ूरी के बाद वह खातों में जमा होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी भी लंबे अनुमान में एक ही दर मानना सिर्फ़ एक उदाहरण है, वादा नहीं।
दूसरी बात जो लोग नहीं जानते: कर्मचारी का अपना सालाना योगदान 2,50,000 रुपये से ऊपर चला जाए तो उस अतिरिक्त हिस्से पर मिलने वाला ब्याज कर योग्य हो जाता है। जहाँ नियोक्ता योगदान नहीं करता, वहाँ यह सीमा 5,00,000 रुपये है। ऊँची सैलरी पर स्वैच्छिक योगदान बढ़ाने से पहले यह देख लेना चाहिए।
तीसरी: पेंशन वाले हिस्से से बनने वाली मासिक पेंशन का अपना फ़ॉर्मूला है — पेंशन योग्य वेतन को पेंशन योग्य सेवा से गुणा करके सत्तर से भाग दिया जाता है, सेवा अधिकतम 35 वर्ष गिनी जाती है, और न्यूनतम पेंशन एक हज़ार रुपये महीना है।
आपका नंबर अलग क्यों निकल सकता है
यह अनुमान पूरे कार्यकाल के लिए एक ही ब्याज दर और एक जैसी सालाना वेतन वृद्धि मानकर चलता है। असल ज़िंदगी में दोनों बदलते हैं। इसके अलावा नौकरी बदलने पर खाता समय से न जोड़ना, बीच में निकासी, बिना वेतन वाली छुट्टी और नियोक्ता का देर से जमा करना — सब असर डालते हैं।
अपना असली बैलेंस UAN से epfindia.gov.in पर या उमंग ऐप पर देखा जा सकता है, और वही आँकड़ा अंतिम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 12 % से ज़्यादा योगदान किया जा सकता है? हाँ, स्वैच्छिक भविष्य निधि के ज़रिए। नियोक्ता के लिए उतना बढ़ाना ज़रूरी नहीं होता। ध्यान रहे कि कर्मचारी के सालाना योगदान की जो सीमा ऊपर बताई गई है, उससे आगे ब्याज कर योग्य हो जाता है।
वेतन सीमा क्या बढ़ने वाली है? पेंशन योजना की 15 हज़ार रुपये वाली सीमा कई वर्षों से नहीं बदली और उसकी समीक्षा चल रही है। जब तक श्रम मंत्रालय की अधिसूचना नहीं आती, कटौती पुरानी सीमा पर ही होती रहेगी। इसीलिए कैलकुलेटर में यह भरी जाने वाली रकम है।
नौकरी छोड़ने पर PF का क्या होता है? खाता चलता रहता है, पर बेरोज़गारी की एक तय अवधि के बाद उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। नई नौकरी में उसी UAN से खाता जोड़ लेना सबसे अच्छा है, क्योंकि पेंशन के लिए सेवा की गिनती लगातार रहनी चाहिए।
पेंशन कब से मिलती है? सामान्य सेवानिवृत्ति की उम्र 58 वर्ष है और उसके लिए कम से कम दस वर्ष की पेंशन योग्य सेवा चाहिए। उससे पहले घटी हुई दर पर पेंशन लेने का विकल्प भी है।