म्यूचुअल फंड SIP कैलकुलेटर

लेखक: Henrick Yau

कैलकुलेटर

SIP हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है। हर किस्त अपनी बची हुई निवेश अवधि तक बढ़ती है, इसलिए पहली किस्त सबसे ज़्यादा और आखिरी सबसे कम बढ़ती है — यही चक्रवृद्धि है।

अनुमानित रिटर्न आपको खुद भरना है। कोई प्राधिकरण म्यूचुअल फंड के भविष्य का रिटर्न प्रकाशित नहीं करता, और SEBI के नियम बीते प्रदर्शन को आगे की गारंटी की तरह दिखाने की इजाज़त नहीं देते।

आपका निवेश

कर की दरें (बदली जा सकती हैं)

SIP का गणित सीधा है, अनुमान नहीं

SIP हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है। हर किस्त अपनी बची हुई निवेश अवधि तक बढ़ती है, इसलिए दस साल की SIP में पहली किस्त दस साल बढ़ती है और आख़िरी किस्त एक महीना भी नहीं। यही चक्रवृद्धि है, और यही वजह है कि जल्दी शुरू करने से इतना फ़र्क़ पड़ता है।

जो हिस्सा सीधा नहीं है वह अनुमानित रिटर्न है। कोई प्राधिकरण म्यूचुअल फंड का भविष्य का रिटर्न प्रकाशित नहीं करता, और SEBI के नियम बीते प्रदर्शन को आगे की गारंटी की तरह दिखाने की इजाज़त नहीं देते। इसीलिए इस कैलकुलेटर में रिटर्न आपका भरा हुआ आँकड़ा है, कोई तय दर नहीं।

गणना किस क्रम में होती है

  1. सालाना रिटर्न को महीने की दर में बदला जाता है — बारह से भाग देकर।
  2. हर महीने पहले पिछली जमा राशि बढ़ती है, फिर उस पर नई किस्त जुड़ती है।
  3. स्टेप-अप — अगर आपने हर साल SIP बढ़ाने का विकल्प चुना है, तो हर बारह महीने बाद किस्त उतने प्रतिशत बढ़ जाती है।
  4. शुरुआती एकमुश्त निवेश पूरी अवधि तक बढ़ता है और अलग जोड़ा जाता है।
  5. लाभ = अवधि पूरी होने पर की रकम घटा कुल निवेश।
  6. पूँजीगत लाभ कर का मोटा अनुमान लाभ पर लगाया जाता है।

इक्विटी फंड में बारह महीने से ज़्यादा रखी गई यूनिटों का लाभ दीर्घकालिक माना जाता है। ऐसे लाभ पर सालाना 1,25,000 रुपये तक कोई कर नहीं लगता और उससे ऊपर साढ़े बारह प्रतिशत की दर लगती है। बारह महीने से कम में बेचने पर दर 20 % है।

जिस बात पर सबसे ज़्यादा भरोसा टूटता है: रिटर्न की मान्यता

लोग अक्सर पिछले कुछ वर्षों का औसत रिटर्न भरकर उसे बीस साल आगे तक खींच देते हैं। बाज़ार ऐसे नहीं चलता — वही औसत बीच के वर्षों में बहुत ऊपर-नीचे रहा होता है, और अगर आपको पैसा किसी बुरे वर्ष में निकालना पड़ा तो असली नतीजा अनुमान से बहुत नीचे रह सकता है।

दूसरी बात कर की है। यह कैलकुलेटर मानकर चलता है कि पूरी रकम एक ही वर्ष में भुनाई गई, इसलिए सालाना छूट सिर्फ़ एक बार लगती है। असल में लोग किस्तों में भुनाते हैं और हर वर्ष की छूट अलग-अलग मिलती है — इसलिए यहाँ दिखने वाला कर ऊपरी अनुमान है, असली रकम आमतौर पर कम बैठती है।

तीसरी: SIP की हर किस्त अपनी अलग तारीख़ से गिनी जाती है। आख़िरी कुछ महीनों की किस्तें बेचते समय बारह महीने पूरी नहीं कर पाईं, तो उन पर अल्पकालिक दर लगती है।

आपका नंबर अलग क्यों निकल सकता है

यहाँ फंड का व्यय अनुपात, एक्ज़िट लोड और प्रतिभूति लेनदेन कर शामिल नहीं हैं — तीनों असली रिटर्न को घटाते हैं। किस्त की तारीख़ और उस दिन की NAV भी नतीजा बदलती है, क्योंकि असली SIP महीने की एक तय NAV पर नहीं चलती।

लाभांश विकल्प चुनने पर बीच-बीच में पैसा हाथ में आता है और चक्रवृद्धि टूट जाती है। इसके अलावा बीच में SIP रोक देना या किस्त चूक जाना, जो असल में बहुत होता है, यहाँ नहीं गिना गया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैलकुलेटर में कौन-सा रिटर्न भरूँ? जो आपको वाजिब लगे, और एक से ज़्यादा भरकर देखें। सबसे उपयोगी तरीक़ा यह है कि एक अच्छा और एक ख़राब अनुमान दोनों भरकर देखें कि नतीजा कितना बदलता है — वही फ़र्क़ आपके निवेश का असली जोखिम है।

क्या SIP शेयर बाज़ार के गिरने से बचाती है? नहीं, पर वह ख़रीद की क़ीमत को औसत कर देती है। गिरते बाज़ार में उसी रकम में ज़्यादा यूनिट मिलती हैं। इसका फ़ायदा तभी है जब आप गिरावट के दौरान SIP बंद न करें।

स्टेप-अप SIP कितना फ़र्क़ करती है? हर साल किस्त बढ़ाने से कुल निवेश भी बढ़ता है और उस पर चक्रवृद्धि का समय भी मिलता है। कैलकुलेटर में स्टेप-अप शून्य से बढ़ाकर देखिए — फ़र्क़ आमतौर पर उम्मीद से बड़ा होता है।

पूँजीगत लाभ कर कब देना पड़ता है? जब आप यूनिट बेचते हैं, तब — जमा रहने के दौरान नहीं। दीर्घकालिक लाभ पर सालाना छूट सभी इक्विटी निवेशों को मिलाकर एक ही है, हर फंड की अलग नहीं।